Amazon

Sunday, 16 December 2018

EK ILTIJA - 2

देखो सारी बातें ख़त्म होने पर भी , बातें कुछ बाकी हैं  ,
मुझमें मैं कहीं नहीं हूँ , पर तुम्हारी यादें कुछ बाकी हैं ,
और आज सब बातें भुला कर एक बात कहना चाहता हूँ ,
बेबसी में हारे इस दिल का हाल कहना चाहता हूँ ,
कि सवाल नहीं लेकिन मलाल बहुत हैं ,
बवाल नहीं लेकिन ज़ज़्बात बहुत हैं ,
जो इस दिल ही दिल में कहीं थमते नहीं ।

देखो जानता हूँ कि अब वहां खड़ी तुम मिलोगी नहीं
लेकिन फिर भी उस मोड़ पर जा के रुक जाता हूँ मैं ,
यकीन रहा नहीं अब उस भगवान् पर
फिर भी उस गुरूद्वारे के आगे झुक जाता हूँ मैं ,
जानता हूँ कि अब तुम अपने हाथों से खिलाओगी नहीं
लेकिन फिर भी घर से भूखा आता हूँ मैं ,
ना सुनोगी ना ही साथ में गाओगी
फिर भी वो "अपना गीत" गुनगुनाता हूँ मैं ,
और यह सब सुना के दिल दुखाना नहीं चाहता ,
बस इतना कहना चाहता हूँ मैं ,
कि सवाल नहीं लेकिन मलाल बहुत हैं ,
बवाल नहीं लेकिन ज़ज़्बात बहुत हैं ,
जो इस दिल ही दिल में कहीं थमते नहीं ।

देखो हो सके तो तवक़्क़ - बेतवक़्क़ कभी मिल ही लेना
देखना चाहता हूँ कि कितना खुश-नसीब हूँ मैं ,
जो दूर हुआ ही ना कभी एक पल भी मुझसे
आज भी उसके कितना करीब हूँ मैं ,
लेकिन पहले जैसे पूछना ना हाल मेरा
तुमसे झूठ बोल ना पाउँगा कि ठीक हूँ मैं ,
जानता हूँ कि अब भी चिन्ता करोगी मेरी
इसलिए सच बोल ना पाउँगा कि बे-उम्मीद हूँ मैं ,
बस छुपा लेना मुझे बाहों में अपनी
रूह से रूह को बताना चाहता हूँ ,
कि सवाल नहीं लेकिन मलाल बहुत हैं ,
बवाल नहीं लेकिन ज़ज़्बात बहुत हैं ,
जो इस दिल ही दिल में कहीं थमते नहीं ।।

EK ILTIJA - 1 

No comments:

Post a Comment

Thanks for your valuable time and support. (Arun Badgal)