KUDRAT

किस्मत वाले हैं जो निभा पाते हैं ,
वरना हर किसी ने अपने-अपने तरीके से भुला दिया ,
किसी ने धुएँ में उड़ा दिया तो किसी ने महखाने में बहा दिया ,
पर देख मेरी हिम्मत ना हार मानी ना किस्मत ने साथ दिया ,
बस एक पेड़ लगा दिया, दो पंछी पाल लिए और एक दीया जला दिया ,
देख कैसे अपनी मोहब्बत को मैंने कुदरत बना दिया ।

वो जिसे हर रोज़ नमस्तक करती हो तुम
छुप ना जाये कहीं वो सुबह का सूरज
अपना दिल जला के हवा में उछाल दिया ,
वो जहाँ दोपहर को खाने के बाद टहलती हो तुम
वो तुम्हारे ऑफिस के पास कच्चे रास्ते पर
दुआओं का घास बिछा दिया ,
वो जिसे हर शाम पढ़ती हो तुम चाय की चुस्कियों के साथ
अपने हर ज़ज़्बात को अल्फ़ाज़ बना के
उस रसाले में छपवा दिया ,
और हाँ वो जो रात के साये में
नींद को ओढ़ कर गुनगुनाती हो तुम ,
पेड़ों को राग , दीये को आलाप
और पंछिओं को वो गीत सीखा दिया ,
देख कैसे अपनी मोहब्बत को मैंने कुदरत बना दिया ।

माफ़ करना जो बना ना पाया तुम्हें अपनी इस दुनिया का हिस्सा ,
पर तुम्हारे चेहरे को खुदा और तुम्हारे नाम को नमाज़ बना दिया ।
देख कैसे अपनी मोहब्बत को मैंने कुदरत बना दिया ।।

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