DIYA

सुन इन त्यौहारों के दिनों में जहाँ लोग तोहफों का लेन-देन कर रहे हैं ,
वहाँ मैं सिर्फ एक ही अर्ज़ करता हूँ तुझसे कि ,
यह जो हमने ग़मों के साये में उम्मीद का एक दिया जलाया है ,
बस इसे कभी बुझने ना देना।

यह जो दिया जलाया है हमने ,
यह हमारे हाथों की मिट्टी से बना हुआ दिया है ,
जिसमें हमारे दिलों का तेल निचोड़ के डाला हुआ है ,
और ज़ज़्बातों की बत्ती ने खुद जल के ,
हमारी ज़िन्दगी के अंधेरों को दूर किया है।
अब इस उजाले को कभी रुकने ना देना ,
यह जो हमने दिया जलाया है अपने अरमानों का ,
बस इसे कभी बुझने ना देना।

और यह दिया हमारे दिलों में एक एहसास रहेगा ,
मैं रहूँ भी या ना रहूँ , यह हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा ,
जैसे महसूस करती हो तुम मेरे सीने की गरमाईश ,
तुम्हारे सीने में इसका ताप रहेगा।
और इस ताप के सूर्य को कभी छुपने ना देना ,
यह जो हमने दिया जलाया है अपने सपनों का ,
बस इसे कभी बुझने ना देना।
बुझ भी जाए अगर मेरी आँखों की रोशनी ,
तो भी कभी इस दिये का तेज बुझने ना देना ,
यह हमारी रूह का दिया कभी बुझने ना देना।
बस यह दिया कभी बुझने ना देना ।। 

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