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Friday, 24 February 2017

BADLAAV

इन  हवाओं को कहदो तूफानों में  बदल जाओ ,
महख़ानों को कहदो तहखानों में बदल जाओ ,
बदल गई जो आज नज़र किसी की ,
इन उजालों को कहदो वीरानों में बदल जाओ। 

इन तीरों को कहदो निशानों में बदल जाओ ,
पीरों को कहदो हैवानों में बदल जाओ ,
जीते-जी आज फिर कोई मरा है ,
इन महफ़िलों को कहदो शमशानों में बदल जाओ। 

इस कदर बदल जाने दो आज काइनात यह सारी ,
इस कदर बदल जाने दो आज कुदरत यह सारी ,
कि आज किसी भी सागर में दरिया ना मिले ,
किसी दरिया में कोई नदियाँ ना मिले ,
बहती जाये आज लहरों की मार से ,
किसी भी नाव को कोई मलाह न मिले।
कि आज किसी भी शायर को कोई कलम न मिले ,
किसी कलम को कोई अलफ़ाज़ न मिले ,
मिल भी जाये अगर किसी अलफ़ाज़ को आवाज़ ,
तो उस आवाज़ को सुर - साज़ ना मिले।
इस कदर बदल जाने दो आज असूल सारे ,
बदल जाने  दो आज दस्तूर सारे,
इन्सान की फ़ितरत तो बदलने से रही ,
जाओ उस ख़ुदा को कहदो शैतानों में बदल जाओ ।।
इन  हवाओं को कहदो तूफानों में  बदल जाओ ,
महख़ानों को कहदो तहखानों में बदल जाओ।।

7 comments:

  1. Ultimate veere.. Keep it up,����

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    1. Thnku Arun Dua bro.... Keep loving keep supporting

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  2. Good hai bhai... Keep sharing..

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    1. Thnku Arvind paji... Keep loving n supporting

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  3. Indeed a good one and finally something out of your vocab trap.... Keep writing...U can't live without

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  4. Thnku dear .. Keep supporting..keep loving ...

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  5. Chuk kalam tu likhta bhut kuch, jive aj he sb badal jana...
    Andar chaati maar mere dost,is badlaav nu labhde tu khud kina badal reha...

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Thanks for your valuable time and support. (Arun Badgal)