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Friday, 27 September 2019

HUNAR

जानता हूँ कि रंगों से बेरंग तस्वीर हूँ एक ,
फिर भी सूनी दीवारें सजाने का हुनर रखता हूँ ,
बिन आवाज़ के बेताल साज़ हूँ एक
फिर भी दिल बहलाने का हुनर रखता हूँ ।

माना कि एक तारा हूँ , गर्दिश का मारा हूँ ,
फिर भी रोशनाने का हुनर रखता हूँ ,
नम आँखों में सपनों की चाह देखने के लिए ,
खुद टूट जाने का हुनर रखता हूँ ।

नींद किसी के सिर से वार आई हैं यह आंखें ,
फिर भी ख्वाब सजाने का हुनर रखता हूँ ,
नसीब में तो नसीब नहीं, ख्वाबों में ही सही ,
उसकी बाहों में ढल जाने का हुनर रखता हूँ ।

माना कि हिम्मत नहीं है कुछ कह पाने की ,
लेकिन सब सह जाने का हुनर रखता हूँ ,
चाहे ग़मों की सियाहियाँ पड़ गई मासूम चेहरे पर,
फिर भी जोकर ज़ात से हूँ , हसाने का हुनर रखता हूँ।

अगर कोई गुफ़र है तुम्हारे दिल में तो तुम भी बोल दो ,
इल्ज़ामों से भरा पड़ा हूँ, लेकिन तहखाने का हुनर रखता हूँ ,
कड़वा  हूँ , लेकिन हर ज़ुबान पर हूँ ,
तोहमत भी हूँ , रहमत भी हूँ , महखाने का हुनर रखता हूँ ।।

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